100 साल पहले बैलगाड़ी पर ले जा रहे थे गणेशजी की प्रतिमा, राजबेड़ा में पहिए टूटे तो यहीं स्थापना
कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत नरिहा के आश्रित ग्राम राजबेड़ा में भगवान गणेश और मां दुर्गा की दुर्लभ प्रतिमा स्थित है। इस प्रतिमा में भगवान गणेश मूशक पर बैठे हुए हैं। यह मूर्ति अत्यंत सुंदर, आकर्षक नक्कासीदार और दिव्य दुर्लभ कलाकृति से परिपूर्ण है।
इस मंदिर के पुजारी बजारू सलाम ने बताया कि यह दुर्लभ मूर्ति धरती के गर्भ से प्रकट हुई है जो करीब 100 साल पहले की है। उन्होंने बताया कि इस मूर्ति को कुछ लोग बैलगाड़ी में ले जा रहे थे तभी रास्ते में ही बैलगाड़ी के पहिए टूट गए और वे मूर्ति ले जाने में नाकाम रहे। इसके बाद सभी ने उस मूर्ति को उसी जगह पर लाकर रख दिया। जिसके बाद ग्रामीण सालों से इस प्रतिमा की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ कर रहे हैं।
पंचायत ने मंदिर के जीर्णोद्धार की बनाई योजना
पुजारी ने बताया कि गणेश प्रतिमा हर साल बढ़ रही है। ग्रामीणों की मांग ग्राम राजबेड़ा के लोगों ने मंदिर का निर्माण करवाया। जिसके बाद से यह प्रतिमा इसी मंदिर में स्थापित है। ग्राम राजबेड़ा के वार्ड पंच दशरूराम सलाम ने कहा कि करीब 50 साल पहले कांग्रेसी नेता ने इस जगह का जीर्णोद्धार करने के लिए गांव वालों को बुलाया था लेकिन डर के चलते ग्रामीण उनके पास नहीं गए। जिसके चलते इस जगह का विकास नहीं हो पाया है। पंचायत ने मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना बनाई है।
ऐसे पहुंच सकतें हैं रजबेड़ा गांव के इस मंदिर में
नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूरी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों को जिला मुख्यालय से बेनूर आना पड़ेगा। इसके बाद यहां से 7 किमी दूर दंडवन जाना पड़ेगा। इसके बाद मंदिर तक पहुंचने के लिए दो गांव छिनारी और बैलापाड़ से होकर गुजरना पड़ेगा। इसके बाद राजबेड़ा गांव जहां पर यह मंदिर बना हुआ है इस गांव की आबादी करीब 150 है। कोंडागांव से यह मंदिर करीब 60 किमी से ज्यादा है। कोंडागांव से भाटपाल तक जाना पड़ेगा। यहां से बयानार और ग्राम पंचायत नरिया और उसके बाद राजबेड़ा गांव है जहां पर यह मंदिर है।
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