अब ड्राइवर-कंडक्टरों ने मांगा गुजारा भत्ता
मार्च माह में लॉकडाउन शुरू होने के बाद से यात्री बसों का संचालन बंद है। पांच महीनों से बसें नहीं चलने से बस चालक, परिचालक तथा अन्य स्टाफ की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है। कई परिवारों को तो घर चलाना तक मुश्किल हो गया है। बसों के चालक, परिचालक तथा अन्य स्टाफ ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप तीन माह का गुजारा भत्ता देने की मांग की है।
19 अगस्त को बस कर्मचारी कल्याण समिति से जुड़े लोग कलेक्टोरेट पहुंचे तथा कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर कार्यालय के कर्मचारियों को ज्ञापन सौंपा। बड़ी संख्या में पहुंचे बस चालक, परिचालक, हेल्पर, बुकिंग एजेंट ने कहा कि यात्री बसें 21 मार्च से बंद है जो अभी तक शुरू नहीं हो पाई हैं। बसों को बंद हुए पांच महीने बीत चुके हैं। जुलाई के प्रथम सप्ताह में जरूर कुछ बसें चलना शुरू हुई लेकिन रायपुर में बड़ी संख्या में कोरोना मरीज मिलने से लगे लॉकडाउन के चलते फिर से चलना बंद हो गईं। रायपुर-जगदलपुर मार्ग के अलावा पखांजूर, भानुप्रतापपुर, नरहरपुर, नगरी मार्ग पर चलने वाली बसों पर ही कांकेर जिले के 200 लोग निर्भर हैं।
उधारी लेकर काम चला रहे
बस चालक, परिचालक, हेल्पर व बुकिंग एजेंटों का कहना है किराना दुकानों से अब उधारी में सामान मिलना मुश्किल हो गया है। रिश्तेदार भी अब मदद करने से कतरा रहे हैं। कर्मचारी कल्याण कल्याण संघ अध्यक्ष मो इलशाद ने कहा कि गुजारा भत्ता देना चाहिए।
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