निजी स्कूलों के लिए अब तक नहीं पहुंचीं सरकारी किताबें
सरकारी स्कूलों में निशुल्क बंटने वाली कक्षा पहली से दसवीं तक की पुस्तकें पहुंच चुकी हैं लेकिन निजी स्कूलों में सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली पुस्तकें अभी तक नहीं पहुंच पाई है। पुस्तकें नहीं पहुंचने से छात्र परेशान हैं क्योंकि पुस्तकों के अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई करने में भी परेशानी हो रही है। सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी की भी अंग्रेजी माध्यम की पुस्तक नहीं पहुंच पाईं हैं।
पहली से दसवीं कक्षा तक के बच्चों को निशुल्क पुस्तक 14 अगस्त तक पहुंचाने का लक्ष्य था। जिले मेें सरकारी स्कूलों में बंटने वाली पुस्तकें पहुंच चुकी हैं तथा संकुल समंवयक तथा शिक्षकों के माध्यम से छात्रों को बंटने भी लगीं हैं। लेकिन निजी स्कूलों में पढऩे वाले जिले के 14 हजार 644 छात्रों को पुस्तकें अभी तक नहीं पहुंच पाई है। निजी स्कूलों के लिए हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों माध्यम की पुस्तकें पहुंचनी है लेकिन किसी भी माध्यम की किसी भी कक्षा की पुस्तक अभी तक नहीं पहुंच पाई है। निजी स्कूलों के प्राचार्य लगातार जिला शिक्षा कार्यालय पहुंच पुस्तकों की मांग कर रहे हंै। निजी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है लेकिन पुस्तकें नहीं होने से ऑनलाइन पढ़ाई में भी परेशानी हो रही है।
परलकाेट क्षेत्र में रहते हैं बांग्लाभाषी बच्चे
जिले में इस बार प्राथमिक स्कूलों के लिए स्थानीय भाषा जैसे गोंडी, हल्बी के अलावा बांग्ला विषय की भी पुस्तकें पहुंची है। जिले के परलकोट क्षेत्र में बड़ी संख्या में बंग बंधु रहते हैं तथा वहां के छात्र स्थानीय भाषा के रूप में बांग्ला का चयन करते हैं। यही कारण है कि जिले में पहले भी बांग्ला भाषा की पुस्तकें पहुंचती रहीं है लेकिन गोंडी तथा हल्बी भाषा की पुस्तकें पहली बार पहुंचीं हैं।
शीघ्र पहुंचेगी निजी स्कूलों की भी पुस्तकें
राजीव गांधी शिक्षा मिशन जिला समन्वयक आंनद गुप्ता ने कहा निजी स्कूलों में भी बंटने वाली निशुल्क पुस्तकें जिले में शीघ्र ही पहुंच जाएंगी। इसकी प्रक्रिया चल रही है। इस साल पहली बार गोंडी व हल्बी भाषा की भी पुस्तकें पहुंची हैं।
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