गोबर और कचरे से कांगाेली में बनेगी कंपोस्ट खाद
गोधन न्याय योजना के तहत गोबर बेचने वाले लोगों की संख्या नगर निगम क्षेत्र में बढ़ती जा रही है, लेकिन शहर के एसआरएलएम सेंटराें में गोबर और गीले कचरे को रखने के लिए अब तक कंपोज्ड शेड की कमी है। इस समस्या से निजात पाने निगम ने अब शहर के कांगोली में गीले कचरे और गोबर को मिलाकर वर्मी कंपोस्ट बनाने जा रहा है। इसके लिए वहां पर बनाए गए 34 पिट (टांका) का उपयोग किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक नगर निगम ने आनन- फानन में गोधन न्याय योजना को लेकर शहर के पांच एसआरएलएम सेंटर में खाद बनाने की योजना तो बनाई। सरकार से जारी निर्देश के तहत इस योजना पर काम भी शुरू कर दिया, लेकिन अब तक चार सेंटर में कपोज्ड शेड नहीं बन पाए। इधर दूसरी ओर 2 रुपए प्रति किलो के दाम पर गोबर बेचने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। सेंटर में बड़े पैमाने पर गोबर और गीला कचरा इकट्ठा न हो और लोगों को इसके चलते होने वाली परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए निगम ने यह योजना बनाई है। गौरतलब है कि निगम जिस पिट को वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए उपयोग करने जा रहा है उस पिट में खाद बनाने की योजना पहले भी बनाई गई थी। इस योजना पर निगम ने हजारों रुपए खर्च किया था। बावजूद इसके निगम इस योजना को शुरू नहीं कर पाया और पिट केवल शोपीस बनकर रह गए थे। इधर जब इस योजना को लेकर निगम स्वच्छता अधिकारी योगेश पांडे से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वर्मी कंपोस्ट आने वाले दिनों में शहर के हर एसआरएलएम सेंटर में बनाया जाएगा, लेकिन अभी कांगोली और बोधघाट तिराहे के पास खाली जगह पर बनाया जाएगा। कांगोली में पहली बार खाद बनाई जा रही।
शहर में 30 दिन में 543 क्विंटल गोबर खरीदा गया
गोधन न्याय योजना के तहत शुरू में एसआरएलएम सेंटर में गोबर बेचने वाले लोगों की संख्या काफी कम थी। कुछ सेंटर में तो खरीदी के बंद होने की बात कही जा रही थी, लेकिन पिछले एक पखवाड़े से लोग बड़ी संख्या में गोबर बेचने के लिए आगे आ रहे हैं। शहर में 30 दिन में करीब 40 लोगों ने 543 क्विंटल गोबर एसआरएलएम सेंटर में बेचा।
442 क्विंटल खाद बेचने से 3.62 लाख की आमदनी
विकासखंड बस्तर, बकावण्ड, जगदलपुर, तोकापाल, लोहंडीगुडा, दरभा, बास्तानार के कुल 93 समूह के 930 महिला सदस्यों द्वारा वर्मी कम्पोस्ट बनाया जा रहा है। महिलाएं एक महीने में 54 गौठान से 478 क्विंटल से ज्यादा वर्मी कम्पोस्ट बनाकर 442 क्विंटल वर्मी खाद बेचकर 3 लाख 62 हजार रुपए से ज्यादा भी कमा चुकी हैं।
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