किसानों ने बैलों की पूजा कर ठेठरी खुरमी का लगाया भोग, आज से मनेगा नयाखानी
कोरोना काल में भाद्रपद अमावस्या के बीच मंगलवार को पोला पर्व सादगी से मनाया गया। किसानों ने बैलों को सुबह स्नान कराकर श्रृंगार किया फिर पूजा-अर्चना की। वहीं जिस घर में बैल नहीं है उन्होंने मिट्टी के बने बैल की पूजा कर ठेठरी, खुरमी का भोग लगाया। पोला के दिन खेतों में जुताई का काम बंद रहा। मिट्टी से बने खिलौनों की पूजा के बाद उसे बच्चों को खेलने के लिए दिया गया। वहीं बुधवार से बस्तर में नयाखानी का पर्व मनाया जाएगा।
पंडितों ने बताया कि इस बार अमावस्या दो दिन पड़ रहा है, लेकिन मंगलवार को पोला पिठौरा मनाया जाना श्रेष्ठ रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे पोरा तिहार कहा जाता है। बस्तर में नयाखानी पर्व के दौरान बैल की पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व बुधवार से लेकर सोमवार तक अलग-अलग गांवों में मनाया जाएगा, जिसकी तैयारी किसानों ने अभी से कर दी है। धुरवा समाज के गंगाधुर ने कहा कि बस्तर में यह त्योहार सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार मनाया जाएगा। इस पर्व को मनाने के दौरान यह माना जाता है इसी समय से धान के पौधों में दूध भरता है।
बाजार में खूब बिके मिट्टी से बने नंदी बैल
शहर के बाजार में मिट्टी से बने नंदी बैल, चक्की आदि खिलौनों की दुकानें दो दिन पहले से लगी रहीं। पूजन सामान सहित खिलौनों की लोगों ने जमकर खरीदारी की। घर में रहकर लोगों नेे पूूजा-पाठ किया। पंडितों ने बताया कि सालों से इस बात की मान्यता है कि कंस ने भगवान कृष्ण को मारने के लिए पोलासुर नामक राक्षस को मारने के लिए भेजा था, जिसे कृष्ण ने मार दिया था। इसके बाद से नंदगांव के लोग पोला के नाम पर इस पर्व को मनाने लगे थे।
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