खेतों में पोषक तत्वों की कमी दूर करेगा कृषि विभाग
कृषि योग्य भूमि की मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की लगातार कमी होती जा रही है। हालांकि कृषि विभाग हर वर्ष पोषक तत्वों की कमी की समस्या के समाधान के लिए लगातार किसानों को खेतों पर खरपतवार नहीं जलाने और जैविक खाद का प्रयोग करने जागरूक करता आ रहा है। लेकिन इसका कोई विशेष फायदा होते नहीं देखकर विभाग ने अब प्रदर्शन योजना का सहारा लिया है।
इस योजना में विभाग मिट्टी परीक्षण के बाद आए नतीजों के अनुसार किसानों के खेत की मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें जैविक खाद देने के साथ ही अन्य तत्वों की कमी दूर करने के लिए अन्य किसानों को वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद, जिंक और सल्फर के साथ ही अन्य सूक्ष्म और पोषक तत्व देंगे।
गौरतलब है कि सालभर पहले हुए मृदा परीक्षण से पता चला था कि खेतों में आवश्यक पोषक तत्व नाइट्रोजन और फास्फोरस के साथ बोरोन और जिंक के साथ ही कुछ जगहों पर फास्फोरस की कमी मिली है। मृदा परीक्षण की इस रिपोर्ट ने किसानों की परेशानी को बढ़ा दिया है जिसे दूर करने की कोशिश की जा रही है। कृषि विभाग के सहायक संचालक विकास साहू ने कहा कि इस योजना का लाभ किसानों मिलेगा। लक्ष्य पूरा करने के लिए काम शुरू कर दिया गया है।
बस्तर, बकावंड व जगदलपुर में सबसे ज्यादा कमी
जिले के बस्तर, बकावंड और जगदलपुर ब्लॉक के खेतों में इस समय नाइट्रोजन, बोरान, सल्फर, जिंक और फास्फोरस की कमी पाई जा रही है। इइसमें प्रति हेक्टेयर में नाइट्रोजन 280.560 और जिंक 0.6 पीपीएम होना चाहिए जो इस समय बस्तर के खेतोंं में नहीं पाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस समय जहां नाइट्रोजन जहां 120.250 प्रति किग्रा तो वहीं जिंक 0.0 से 1.3 पीपीएएम पाया जा रहा है। इसके अलावा बोरान 0.5 और सल्फर 10 पीपीएम होना चाहिए, जो इस समय 0.2 और 3 से 5 पीपीएम मिल रहा है।
योजना पर प्रति हेक्टेयर खर्च होंगे 2500 रुपए
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए बनाई गई इस योजना में विभाग 168 हेक्टेयर में यह योजना चलाने जा रहा है। मिट्टी परीक्षण प्रभारी विक्रम ने बताया कि इस योजना में कितने किसानों को इसका लाभ मिलेगा यह तय हो गया है लेकिन योजना के तहत प्रति हेक्टेयर में इस योजना पर 2500 रुपए खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि नई योजना का लाभ सबसे अधिक बस्तर ब्लॉक के लोगों को मिलेगा।
जैविक खाद, सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करेंगे
खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए पहली बार चलाई जाने वाली इस योजना में विभाग ने जिले के 168 गांवों का चयन किया गया है । जहां पर विभाग के अधिकारी इन गांवों में लगी फसल में मिट्टी परीक्षण कार्ड में दी गई रिपोर्ट के अनुसार जैविक खाद के साथ सूक्ष्म और पोषक तत्वों का छिड़काव धान के साथ ही अन्य फसलों में करेंगे। इसके बाद उत्तपादन को देखते हुए एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिसे बाद में अन्य गावों में उपयोग किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक जिन 168 गांवों के लिए यह योजना बनाई गई उसमें बस्तर ब्लॉक के 39, बकावंड 36, जगदलपुर 34, लोहंडीगुड़ा 14, तोकपाल 19, दरभा 12 और बास्तानार ब्लॉक के 9 गांव शामिल हैं।
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