Here we are going to provide you all types of all hindi news ,live news ,Bbc Hindi news ,Ndtv hindi news ,Aaj Tak news, watch live tv coverage ,latest khabar ,breaking news ,world ,sports ,bussiness, films so visit to our website and get all the news

Breaking News

खुद चुनौतियों का सामना कर बने राष्ट्रीय खिलाड़ी, अब कोच बन फ्री में दे रहे ट्रेनिंग

शनिवार को राष्ट्रीय खेल दिवस है। जिला बनने के बाद 8 साल में 5हजार 326स्टेट और 656 नेशनल खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में जिले का प्रतिनिधित्व कर 168 मेडल जीतकर जिले की झोली में डाल चुके है।
म्यूथाई, त्वाईक्वांडो, खो-खो, एथलेटिक्स, साॅफ्टबाल, रग्बी, जंप रो जुड़ो एवं भारोत्तोलन, कबड्डी, व्हालीबाल, म्युथाई सहित अन्य खेल में खिलाड़ी राज्य, नेशनल स्तरीय प्रतियोगिता में जिले का प्रतिनिधित्व करते आ रहे है। जिला खेल अधिकारी नरेन्द्र ठाकुर ने बताया कि कोेरोना काल के चलते इस बार शासन, प्रशासन की ओर से कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं हो रहा है। जिले में कई ऐसे खिलाड़ी है, जो संघर्ष कर आगे बढ़ें और सफलता पाई। जिन्होंने संसाधनों की कमी, सुविधाओं का अभाव, पैसे की तंगी को बाधा नहीं बनने दी। अब ये प्रतिभाओं को निखार रहे हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर भास्कर ने इनसे विशेष चर्चा की।

खेलने जगह नहीं थी तो बगीचा को ही बनाया मैदान
ग्राम बघमरा के (हाल निवास भिलाई, दुर्ग) कोच व नेशनल खिलाड़ी नामदेव साहू, जो 17 साल में एक हजार से ज्यादा कबड्डी खिलाड़ी तैयार कर चुके है। कोरोना काल में भी टिप्स दे रहे है। इन्हें 2019 में राष्ट्रीय खेल दिवस पर शहीद विनोद चौबे सम्मान से सीएम, खेलमंत्री ने सम्मानित किया था। पिछले 20 वर्षों से युवाओं को निशुल्क कोचिंग दे रहे है। गांव से एक किमी दूर जाम बगीचा था, वहीं से ही खेल अभ्यास का सिलसिला शुरु हुआ।

खुद नहीं जीते गोल्ड, दूसरे खिलाड़ियों को बनाया काबिल
राज्य स्तरीय शहीद पंकज विक्रम सम्मान (अवाॅर्ड) से सम्मानित गोरकापार की मेघाश्याम की संघर्ष की कहानी ऐसी है कि उबड़-खाबड़ मैदान व अभावों के बीच खेलकर टेनीक्वाइट खेल का नेशनल प्लेयर बना। गोरकापार के अलावा सुखरी, नहर खपरी, सकरौद, सिरसिदा, परसदा (डंगनिया), दुर्ग जिले के पाटन ब्लाक के 14 से 22 साल तक के 50 से ज्यादा खिलाड़ियों को प्रेरित कर खेल अभ्यास कराया। खुद गोल्ड मेडल नहीं जीत सके पर 4 खिलाड़ियों को इसके लायक बनाया।

पोलियो से पीड़ित फिर भी 200 मीटर दौड़ में जीते गोल्ड
बालोद व धमतरी जिले के सरहद पर बसे पेरपार गांव के देवराम की संघर्ष की कहानी दूसरों को हार न मानने की सीख देती है। जो बचपन से ही पोलियो से ग्रसित है। जिसके कारण दायां पैर काम नहीं करता। बावजूद खेल के प्रति इनकी दिलचस्पी ऐसी रही कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने के लिए लोगों से कर्ज लिया। असफलता मिली तो ताने सुनने को भी मिले। बावजूद हार नहीं मानी। जिन खिलाड़ियों ने इन्हें हराया, उन्हीं से खेल की तकनीकी सीखी, सफलता पाई। आज भी यह सिलसिला जारी है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3hF8j0W
via IFTTT

No comments