तीज के साथ बाजार में बढ़ी रौनक आज सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत
कोरोना संक्रमण के बीच शुक्रवार को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर महादेव और माता पार्वती की पूजा कर पति की लंबी आयु की कामना करेंगी।
तीज के साथ बुधवार से बाजार में खरीदारी में तेजी आ गई है। गुरुवार को दिनभर बाजार में महिलाएं श्रृंगार सामग्री, कपड़े, मिठाई, फल की खरीदी के लिए पहुंचती रहीं। मान्यता के अनुसार महादेव को पाने के लिए माता पार्वती ने सबसे पहले हरतालिका व्रत की थी। आचार्य श्याम चंद्र शुक्ला ने बताया कि यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। व्रत करने वाली महिला सूर्योदय से पहले जगकर स्नान, ध्यान कर सोलह श्रृंगार करेंगी। पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरी शंकर प्रतिमा स्थापति की जाएगी। इसके बाद मां पार्वती को सुहाग का सारा सामान अर्पित कर रात में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण कर आरती की जाएगी। प्रेमाबाग मंदिर के आचार्य पं. देवदत्त त्रिपाठी ने बताया कि कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को करती हैं, क्योंकि कथा के अनुसार माता पार्वती ने महादेव को पति के रूप में पाने के लिए विवाह से पहले कठिन तपस्या की थी, लेकिन उस समय माता की सहेलियों ने उन्हें अगवा कर लिया था।
जाने व्रत का नाम हरतालिका क्यों.?
आचार्य त्रिपाठी ने बताया कि हरतालिका के शाब्दिक अर्थ की बात करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है हरत और आलिका, हरत का अर्थ होता है अपहरण और आलिका अर्थात सहेली, इसलिए यह व्रत हरतालिका कहलाता है। इससे एक पौराणिक कथा मिलती है, जिसके अनुसार माता की सखियां उनका अपहरण करके जंगल में ले गई थी।
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