संजीवनी के चालक ने मांगे 4 हजार, मरीज बोला- खाने तक के लिए पैसे नहीं, 70 किमी जाने पैदल ही निकला
मरीजों को अस्पताल से घर और फिर घर से अस्पताल निशुल्क लाने ले जाने 24 घंटे सुविधा देनेे संजीवनी योजना बनाई गई है। इधर, एक गरीब ग्रामीण को कांकेर से रायपुर रेफर किया गया। परिवार के पास खाने तक के पैसे नहीं होने पर परिवार ने रायपुर जाने असमर्थता व्यक्त की तो डाॅक्टरों ने वापस घर जाने अनुमति दे दी। इसके बाद जिला अस्पताल में संजीवनी चालक से बात की तो उसने कहा मंगलवार को कांकेर बाजार की तरह संजीवनी एंबुलेंस सेवा भी बंद रहती है।
वापस छोड़ने के लिए डीजल-ड्राइवर का खर्च चार हजार रुपए मांगे। गरीब परिवार के पास खाने तक के पैसे नहीं थे जिसके चलते पैदल लौटने का निर्णय लिया। दो दिनों में 70 किमी का सफर तय कर परिवार केंवटी तक पहुंचा, जहां सूचना मिलने पर भास्कर प्रतिनिधी ने उनके लिए बाइक का प्रबंध कर कोयलीबेड़ा अस्पताल तक पहुंचवाया। 6 सितंबर को कोयलीबेड़ा विकासखंड के गांव गट्टाकाल निवासी अमलूराम उईके 45 वर्ष बैल बांध रहा था। इसी दौरान बैल ने उस पर हमला कर दिया जिससे अमलू के दांई आंख में चोट आने से दिखना बंद हो गया। मरीज को कोयलीबेड़ा अस्पताल लाया गया जहां से उसे कांकेर जिला अस्पताल रेफर किया गया। संजीवनी ने मरीज को कांकेर छोड़ दिया। यहां मंगलवार को महिला डाॅक्टर ने ग्रामीण के आंख की जांच की जिसमें गंभीर चोट के कारण इलाज के लिए रायपुर जाने की बात कही। गरीब परिजनों ने पैसे नहीं होने पर जाने में असमर्थता व्यक्त की तो डाॅक्टर ने गाड़ी की व्यवस्था करने एक नर्स के पास परिजनों को भेजा। नर्स ने कहा एंबुलेंस में मरीज को डीजल भरवाना होगा। यहां भी परिजनों ने पैसा नहीं होने की बात कही। जिला अस्पताल में तैनात संजीवनी चालक ने परिजनों को कहा मंगलवार को संजीवनी सेवा बंद रहती है। 4 हजार रुपए दें तो छोड़ने का प्रबंध करा दूंगा।
भास्कर की सूचना पर गांव के सरपंच भी पहुंच गए
मरीज व परिजन दो दिन तक पैदल 70 किमी दूरी तय कर भानुप्रतापपुर के आगे केंवटी पहुंचे। इसकी जानकारी भास्कर को लगी तो तत्काल टीम केंवटी पहुंची। मरीज व परिजनों के लिए बाइक का प्रबंध किया। गांव के सरपंच भी सूचना मिलने पर पहुंच गए। इसके बाद मरीज को कोयलीबेड़ा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
लगातार शिकायतें मिल रहीं, तीन दिन पहले भी हुई थी ऐसी घटना
कांकेर से धमतरी या रायपुर रेफर होने वाले मरीजों को ले जाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही है। तीन दिन पहले आग से झुलसे मरीज को छोड़ने एंबुलेंस चालक ने दस हजार रुपए वसूले थे। जानकारी होने परिचालक से पूछताछ की तो गलती मानते हुए पैसे वापस किए।
मरीज के बेटे बोले- डीजल भराने चालक को 4 हजार कहां से देते
मरीज के साथ आए बेटे रत्तूराम, ग्रामीण कंगलूराम ने कहा कि उनके पास खाने तक को पैसे नहीं थे। वाहन में डीजल भराने चालक को चार हजार कहां से देते। दोपहर तीन बजे तक भटकते रहे लेकिन कोई प्रबंध नहीं होने पर मंगलवार दोपहर 3 बजे पैदल घर जाने रवाना हो गए।
ऐसी घटना की गुंजाइश नहीं जांच कर करेंगे कार्रवाई
संजीवनी जिला प्रमुख हाशिम खान ने कहा संजीवनी कर्मचारियों से इस तरह गलती की गुंजाइश नहीं है। संजीवनी एंबुलेंस सभी दिन 24 घंटे चलती है। शिकायत की जांच की जाएगी। कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
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