4 कराेड़ लागत से तैयार उद्यान में एक साल से बंद हैं गाैरव बेटियाें की प्रतिमाएं
बेटियों के प्रति सामाजिक जागृति के लिए बेटी गौरव उद्यान योजना यूआईटी के अफसरों की लापरवाही का शिकार है। एक साल से उद्यान में लगीं महान महिलाओं की प्रतिमाएं प्लास्टिक में पैक हैं। करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से बने इस उद्यान का फायदा नहीं मिल पाया है जबकि वर्क ऑर्डर के अनुसार 31 अगस्त 2018 को काम हो जाना था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने प्रत्येक जिले में बेटी गौरव उद्यान बनाने के निर्देश दिए थे। इसी योजना में कोठारी नदी किनारे उद्यान का निर्माण भी शुरू हुआ। यूआईटी ने इसके कार्यादेश में ठेकेदार को एक जनवरी 2018 को काम शुरू कर 31 अगस्त 2018 कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। लेकिन निर्माण 29 अगस्त 2019 को पूरा हो सका। इसकी पुष्टि कलेक्टर एवं यूआईटी चेयरमैन शिवप्रसाद एम नकाने की अध्यक्षता में 11 सितंबर को हुई ट्रस्ट मीटिंग में भी की गई, जिसमें यूआईटी अफसरों ने माना कि निर्माण कार्य में 363 दिनों की देरी विभागीय कारणों से रही।
बजरी खनन पर प्रतिबंध से देर: बजरी खनन पर प्रतिबंध के बाद यूआईटी ने एम सेंड के प्रयोग की अनुमति दी। आरयूआईडीपी ने पंपिंग स्टेशन निर्माण के लिए खुदाई करने अन्य निर्माण कार्य के लिए रैंप पार्क की तरफ से खोदने के कारण 67 दिन की देरी हुई।
इन 10 महान विभूतियों की प्रतिमाएं हैं बंद... बेटी गौरव उद्यान पूरी से तरह से बेटियों को समर्पित किया है। इसमें देश की महान महिला विभूतियों की प्रतिमाएं स्थापित की हैं। इसमें सायना नेहवाल, बछेंद्री पाल, मेरी कॉम, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, रानी पद्मिनी, पन्नाधाय, मीरा बाई, मदर टेरेसा, लता मंगेशकर एवं कल्पना चावला की प्रतिमाएं स्थापित है, जो लोकार्पण के इंतजार में प्लास्टिक के कवर में बंद हैं।
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