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60 साल में पहली बार सरगुजा फुटबॉल लीग पर असमंजस, कोरोना की वजह से तारीख तय नहीं

सरगुजा संभाग में फुटबॉल की सबसे बड़ी प्रतियोगिता के रूप में पहचाने जाने वाले सरगुजा फुटबाॅल लीग टूर्नामेंट के रोमांच पर कोरोना संक्रमण के कारण 60 वर्षों में पहली बार असमंजस की स्थिति बन गई है। सरगुजा जिला फुटबाल संघ के पदाधिकारियों के यहां इसको लेकर अलग-अलग टीमों के फोन आ रहे हैं। संगठन इसके आयोजन को लेकर ठोस निर्णय नहीं ले पा रहा है। सितंबर में ये प्रतियोगिता हर साल होती थी।
यदि हालात सामान्य बने तो नवंबर में इसे लीग के बजाय नाकआउट के तहत कराया जा सकता है। 60 के दशक में शहर के राममंदिर मंदिर मैदान से शुरू होकर गांधी स्टेडियम में पहुंची इस प्रतियोगिता के मैच अब तक लीग के तहत खेले जाते रहे हैं और आज तक यह कभी ब्रेक नहीं हुआ है। इसका रोमांच देखते ही बनता है। यही वजह अभी इस टूर्नामेंट को लेकर लोग टकी-टकी लगाए रहते हैं। इस टूर्नामेंट में खेलने वाले पुराने व आज के समय में कई खिलाड़ी स्कूल व काॅलेज के अलावा ओपन टूर्नामेंट में स्टेट व राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचे हैं।

सरगुजा लीग टूर्नामेंट फुटबॉल का है स्कूल
खिलाड़ी इस टूर्नामेंट अपने खेल कैरियर का एक अहम हिस्सा मानते हैं। इस टूर्नामेंट में खेलने के बाद छत्तीसगढ़ की टीम से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता संताेष ट्राफी खेलने वाले जिले के मोहनपुर गांव के निवासी चंद्र कुमार केरकेट्‌टा व राबिन केरकेट्‌टा बताते हैं कि इस टूर्नामेंट से हमें सीखने के लिए काफी कुछ मिलता है। यह फुटबॉल का स्कूल है। दोनों वर्ष 2013 से इस टूर्नामेंट में आदानी सरगुजा फुटबॉल अकादमी की टीम की ओर से खेलते आ रहे हैं।

इस टूर्नामेंट का रोमांच देखने के लिए स्टेडियम में पहुंचते हैं हजारों खेलप्रेमी
इस टूर्नामेंट में 77 के दौर में खेलने वाले खिलाड़ी व शहर के पूर्व मेयर प्रबोध मिंज बताते हैं कि पहले दर्शकों से मैदान का किनारे का हिस्सा भर जाता था। 7 से 8 हजार की भीड़ राममंदिर मैदान में पहुंचती थी। मैं खुद यहां पहले मैच देखने जाता रहा और बाद में इसी मैदान में टूर्नामेंट का हिस्सा बना है। वे बताते हैं कि पहले इसका रोमांच अलग ही रहता था।

लीग और नाकआउट टूर्नामेंट में यह है अंतर
लीट टूर्नामेंट में हर टीमें एक दूसरे से मैच खेलती है और नंबर के आधार पर सेमीफाइनल में पहुंची है। सेमीफाइनल में जीतने वाली टीम फिर फाइनल खेलती है। इससे सरगुजा फुटबाल लीग करीब डेढ़ महीने चलता है। पिछले साल सितंबर से अक्टूबर तक चला था। नाकआउट में जो टीम मैच हारते जाती है वह टूर्नामेंट से बाहर होते जाती है। इससे यह कम समय में खत्म हो जाता है। इस साल यदि यह प्रतियोगिता नाकआउट से हुई तो 20 दिन में खत्म हो जाएगी।

नवंबर में कराएंगे टूर्नामेंट: सरगुजा जिला फुटबॉल संघ के सचिव विकास सिंह ने बताया कि टीमों का फोन हमारे पास आ रहा है लेकिन अभी कोरोना के कारण स्थितियां अनुकूल नहीं होने से संगठन ने मैच नहीं कराने का निर्णय लिया है। यदि कोरोना से हालात सामान्य हुए तो नवंबर में कलेक्टर से अनुमति लेने के बाद लीग टूर्नामेंट कराएंगे।



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Confusion over Sarguja Football League for the first time in 60 years, due to Corona, date not fixed


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