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कोरोना+डायबिटीज+हाइपर टेंशन=डेडली कॉम्बिनेशन दम तोड़ने वाले 94 में से 50 को थी ये तीनों बीमारियां

शहर में मंगलवार को कोरोना के 43 नए पॉजिटिव रोगी मिले हैं। जिले में अब तक 8541 व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, वहीं 94 व्यक्ति जान गंवा चुके हैं। सितंबर में लगातार चौथे दिन 100 से कम मरीज मिले हैं। एमबीएस अस्पताल में 11 नए कोरोना पॉजिटिव रोगी मिले हैं। रेलवे के स्टेशन अधीक्षक भी पॉजिटिव आए हैं। सबसे चिंताजनक ये है कि काेरोना के कारण दम तोड़ने वाले 94 में से केवल 9 की मौत कोरोना के कारण हुई है।

बाकी के 85 राेगियों को अन्य रोग भी थे। सीएमएचओ डॉ. भूपेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि सबसे ज्यादा डायबिटीज और हाइपरटेंशन वाले 50 रोगियों की मौत हुई। वहीं दम तोड़ने वाले 18 रोगी हार्ट के मरीज थे। अस्थमा से पीड़ित 15 मरीजों की मौत हुई।

डॉ. तंवर ने बताया कि 60 से ज्यादा उम्र वाले मरीजों की मौत ज्यादा हो रही है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को इस दौरान घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए और उन्हें घर में अन्य लोगों से भी जहां तक संभव हो सके दूर रहना चाहिए। उनकी इम्यूनिटी अपेक्षाकृत कमजोर होती है इसलिए वे आसानी से संक्रमित हो जाते हैं। एमबीएस अस्पताल में 3 इंडोर के व 8 आउटडोर के मरीज पाॅजिटिव मिले हैं।

आउटडोर में जो पॉजिटिव रोगी आए हैं उन सभी काे खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत थी। लक्षणों के आधार पर उनकी जांच कराने पर वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए। अब तक रेलवे के दो स्टेशन मास्टर कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है।
हाेम आइसाेलेशन वाले मरीजाें की देखभाल में समस्या
सीएमएचओ डॉ. भूपेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि होम आइसोलेटेड मरीजों की मुश्किल से देखभाल की जा रही है। मंगलवार को सुपर विजन टीमों ने 32 मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराईं। उन्होंने बताया कि तबीयत बिगड़ने पर दो मरीजों को होम आइसोलेशन से न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल, एक को भारत विकास परिषद अस्पताल और 3 को अलनिया स्थित कोविड-19 केयर सेंटर रेफर किया गया है।

ज्यादा माैतें संक्रमित होने के 8 से 12 दिन के अंदर, इस दाैरान सावधानी बरतें

डाॅ. विजय सरदाना
शुरू के 9-10 दिन में शरीर में वायरस का इंफेक्शन ज्यादा फैलता है। 10 दिन बाद संक्रमण का फैलाव रुक जाता है। इसलिए शुरू के 10 दिनाें में इलाज मिल जाए तो इसे ठीक करना आसान रहता है।
सबसे ज्यादा माैतें भी संक्रमित होने के 8 से 12 दिन के अंदर ही हाे रही हैं। इसलिए लक्षणाें काे अनदेखा न करें।
जाे लाेग ठीक हाे रहे हैं उनकी इम्युनिटी इस बात पर निर्भर करती है कि उनमें वायरल लाेड कितना था और कितना गंभीर संक्रमण था। जितने गंभीर संक्रमण से राेगी ठीक हाेगा उसकी इम्युनिटी उतनी ही मजबूत हाेगी। कम संक्रमण वाले राेगियाें में ठीक हाेने के बाद दाेबारा संक्रमण की आशंका बनी रहती है। क्योंकि उनके शरीर में एंटीबॉडी नहीं बनती। इसलिए उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
जिन मरीजाें के फेफड़ाें में संक्रमण हाेता है, उन्हें ठीक हाेने के बाद भी सावधानी रखनी चाहिए। फेफड़ाें की कैपिसिटी कम हाे जाती है, जिससे उनकी सांस जल्दी फूलने लगती है। इसलिए डाॅक्टर से सलाह लें और फेफड़ाें की एक्सरसाइज शुरू करें।

हृदय रोग है तो खून पतला करने और बीपी की दवा लेने में कोताही न करें

डाॅ. साकेत गाेयल
कोरोना के लक्षण जैसे छाती में भारीपन और सांस फूलना इत्यादि हृदय राेग के भी लक्षण हो सकते हैं। इसलिए किसी भी नए लक्षण पर बिना समय गंवाए तुरंत डाॅक्टर से सम्पर्क करें ताकि उचित इलाज हो सके।
ऑक्सीजन की कमी और फेफड़ों पर दबाव की वजह से रोगी की हालत बिगड़ सकती है। इसलिए राेगी काे निगरानी में रखें और संशय होते ही अस्पताल में भर्ती कराना बेहतर विकल्प है।
कमजाेर हृदय पम्पिंग वाले मरीजाें में हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन और अजिथ्रोमाइसिन जैसी दवाइयों से ईसीजी में बदलाव आ सकते हैं। ये दवा लेते हुए ईसीजी कराना जरूरी है।
बीपी की दवा नियमित लेना आवश्यकता है पर साथ ही किसी भी संक्रमण में बीपी अस्थिर हो सकता है, इसलिए ब्लड प्रेशर पर निगरानी रखें।
कोरोना में फेफड़ों में खून के थक्के बनते हैं। इसीलिए खून पतला करने वाली दवा बंद न करें।
डायबिटीज राेगियाें में एंटीबाॅडीज कम हाेती हैं, इसलिए खतरा भी ज्यादा

डाॅ. जीडी रामचंदानी
डायबिटीज और काेराेना काे दुधारी तलवार कहा जाता है क्याेंकि 50 प्रतिशत डायबिटीज राेगियाें में ब्लड प्रेशर हाेता है, 20 प्रतिशत में हार्ट और 7 से 8 प्रतिशत में किडनी की बीमारियां हाेती हैं।

एंटीबॉडीज कम होने से उनका इम्युन सिस्टम पहले से कमजाेर हाेता है। इसलिए संक्रमण का खतरा भी ज्यादा है।
काेराेना का असर बीटा सेल्स पर भी हाेता है, जिससे इंसुलिन बनना कम हाे जाता है, इस स्थिति में डायबिटीज राेगियाें की मुश्किल बढ़ सकती है।
शुगर लेवल चेक करते रहें और घर से बाहर कम से कम निकलें तो ज्यादा बेहतर है।
अगर सेहत जरा भी खराब होती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि डायबिटीज के जिन मरीजों की कोरोना संक्रमण के बाद मौत हुई है, उन्होंने शुरू में जांच नहीं कराई।
शुगर नियंत्रित रखें, ताकि कोरोना को दवाओं से ठीक किया जा सके।

श्वांस और अस्थमा के राेगियाें के फेफड़े पहले से कमजाेर हाेते हैं, इसलिए निगेटिव होने के बाद प्राणायाम करें

डॉ. विनोद जांगिड़
जिन लोगों को दमा या सांस संबंधी दूसरी कोई बीमारी होती है तो कोरोना ज्यादा घातक असर दिखा रहा है।
चूंकि कोरोना मुख्यतया श्वसन तंत्र को ही प्रभावित करता है। इसलिये श्वांस रोगियों को ज्यादा सावधानी की जरूरत है।
श्वांस के रोगी व धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में श्वांस नलियों में संक्रमण से बचाने वाला सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाता है। इसलिए फेफड़े जल्दी और ज्यादा प्रभावित होते हैं।
कोरोना से फेफड़े संक्रमित होने पर रेस्पिरेट्री फेल्याेर भी हो सकता है।
कोरोना से रक्त वाहिनियों में क्लाॅट हो जाते हैं और श्वांस एवं रक्त संचार दोनों रुक जाता है, ऐसी स्थिति में कई बार आकस्मिक मृत्यु भी देखी गई है।
अब बुजुर्गों के साथ-साथ कई युवाओं में भी फेफड़ाें पर ज्यादा प्रभाव देखने को मिल रहा है। ऐसा वायरस के स्ट्रेन में बदलाव से हाे सकता है। हालांकि अभी इस पर और रिसर्च की आवश्यकता है।
डॉक्टर की सलाह से दवाओं का सेवन उचित मात्रा में, उचित समय तक करें।
श्वांस के रोगी अपनी दवाई एवं इनहेलर का इस्तेमाल बंद न करें।
प्रोटीन डाइट, फल, विटामिन सी व जिंक सप्लीमेंट का सेवन करें।
धूम्रपान एवं अन्य नशा न करें, प्राणायाम एवं योग नियमित करें, चिकित्सक की सलाह से ब्रीथिंग एक्सरसाइज करें।
आंखाें से पानी आना, तेज जलन या लाल हाेना भी काेराेना के प्राथमिक लक्षण हो सकते हैं, इनको हरगिज अनदेखा न करें

डाॅ. सुरेश पांडेय
काेराेना मरीजों की आंखों से कई बार पानी आने व तेज जलन की शिकायत मिली है।

कोरोना रोगियों की आंखों में भी खून के थक्के कहीं भी बन सकते हैं। यह स्थिति खतरनाक है।
आंखों का गुलाबी दिखना भी इस महामारी का प्राथमिक लक्षण हो सकता है। ‘कैनैडियन जर्नल ऑफ ऑप्थलमोलॉजी’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार कंजक्टिवाइटिस (कंजक्टिवा में सूजन और आंखों का गुलाबी होना) तथा केरटोकंक्टिवाइटिस (कॉर्निया तथा कंजक्टिवा में सूजन और आंखों का लाल होना, पानी आना) भी कोरोना के प्राथमिक लक्षण हो सकते हैं।

मास्क के नियमित उपयोग से बढ़ रहा है ड्राई आई का खतरा : लंबे समय तक मास्क पहनने के बाद आंखों में सूखेपन की शिकायत हो रही है। इसे मास्क एसोसिएटेड ड्राई आई (मेड) नाम दिया है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विदुषी पाण्डेय के अनुसार सेन्ट्रल फॉर ऑक्यूलर रिसर्च एण्ड एजुकेशन, वाटरलू (कनाडा) के वैज्ञानिकों ने बताया कि फेस मास्क के ऊपरी हिस्से से सांस निकलने से कॉर्निया से आंसू की पतली परत वाष्पीकृत हो जाती है।

इससे आंखों में चुभन, जलन, थकान, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना, धुंंधला दिखाई देना, आंखें बंद करने की इच्छा होना, आंखों में दर्द एवं सिरदर्द आदि लक्षण हो सकते हैं। इससे बचने के लिए मास्क के ऊपरी हिस्से को नाक पर अच्छी तरह से टेप द्वारा चिपका लें। नोज क्लिप वाला मास्क लगाते हैं तो नाक के हिस्से को नाेज क्लिप से टाइट कर लें।



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