शांति के लिए फोर्स व नक्सली दोनों अहिंसा अपनाएं: आदिवासी समाज
बस्तर में चल रहे नक्सलवाद, आदिवासियों के धर्मांतरण और एनएमडीसी के निजीकरण के मामले में अब आदिवासी समाज एक बड़ी मुहिम चलाने जा रहा है। इसके लिए समाज के लोग न सिर्फ एकजुट हो रहे हैं बल्कि खुलकर अलग-अलग राजनैतिक दलों पर भी निशाना साध रहे हैं।
सोमवार को सर्व आदिवासी समाज ने एक पत्रवार्ता आयोजित की थी। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, राजाराम तोड़ेम, लच्छूराम कश्यप, धरम सोढ़ी, दशरथ कश्यप, कौशल नागवंशी, अरूण कुमार जैसे बड़े आदिवासी नेता शामिल हुए। समाज के राजाराम तोड़ेम ने कहा कि अभी बस्तर हिंसाग्रस्त है इसका नुकसान अदिवासियों को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में अब समाज के लोग चाहते हैं कि यह हिंसा खत्म हो। हिंसा को खत्म करने के लिए हम पुलिस और नक्सली दोनों से गोली त्यागने की अपील कर रहे हैं। गोलियों को त्याग कर ही अहिंसा का रास्ता स्पष्ट हो पाएगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण किया जा रहा है जबकि बस्तर में पांचवीं अनुसूची लागू है और स्टील प्लांट का पूरा काम राज्य सरकार की देखरेख में पूरा हो रहा है। यदि मुख्यमंत्री चाहें तो तत्काल एमओयू को निरस्त कर सकते हैं। तोड़ेम ने आरोप लगाया कि गांव-गांव में आदिवासियों का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है।
भाजपा नेता लच्छूराम बोले- जो आदिवासी के हित में है मैं उनके साथ कांग्रेस नेता नेताम बोले- राज्य सरकार मेनीफेस्टो ही पूरा नहीं कर रही
प्रेसवार्ता के दौरान सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम और वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व विधायक लच्छूराम कश्यप ने भी केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। ऐसा पहली बार देखने को मिला कि आदिवासी हित में दोनों नेताओं ने अपनी पार्टी के खिलाफ बोलने से भी गुरेज नहीं किया। अरविंद नेताम ने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार मेनीफेस्टो में आदिवासियों से किए वादे पूरे नहीं कर रही है और जिन वादों को पूरा करने की कोशिश की जा रही है वह काफी धीमी गति से हो रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान नक्सल मामलों में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की बात कही गई थी लेकिन अब तक रिहाई के लिए सिर्फ दो बार बैठक हुई। इसमें भी रिहाई के लिए पहले आबकारी वाले मामलों को चुना गया है जबकि मेनीफेस्टों में कहा गया था कि नक्सल मामले में जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों को रिहा किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने अपने पार्टीगत ढांचे और संगठन स्तर से बनाई गई अलग-अलग समितियों पर भी सवाल खड़े किए और ये भी कहा कि आदिवासी हित के लिए पार्टी के बड़े नेताओं से भी वे भिड़ रहे हैं। इसके अलावा लच्छूराम ने कहा कि एनएमडीसी के निजीकरण से आदिवासियों का नुकसान हो रहा है ऐसे में वे समाज के साथ हैं और हर स्तर पर इसका विरोध करेंगें और समाज के साथ खड़े रहेंगे। इसी तरह लड़ाई लड़ते रहेंगे।
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