उमरादाह में सौ फीट से गिर रहा पानी, गुफा में आदिमानवकाल के शैलचित्र
राजा गोयल | कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लॉक में फिर नया जलप्रपात और गुफा मिले हैं। इससे पहले ब्लॉक में 9 जलप्रपात मिल चुके हैं। कुएंमारी इलाके से निचले क्षेत्र बटराली से करीब 19 किमी की दूरी पर ग्राम होनहोड़ के पास उमरादाह में जलप्रपात और कठनगुंडी गुफा मिली है। ये दोनों ही जगहें ट्रैकिंग के लिहाज से बेहतरीन हैं। नई ग्राम पंचायत उमरादाह के नाम पर ही जलप्रपात को भी उमरादाह जलप्रपात कहा जाता है।
जलप्रपात और गुफा को भू-विज्ञान विशेषज्ञ जितेंद्र नक्का ने गांव के सरपंच पनकाराम कुरेटी के सहयोग से इसे ढूंढ निकाला है। उमरादाह जलप्रपात की खास बात ये है कि यहां डोलेराइट की चट्टानों के बीच सफेद ग्रेनाइट की चट्टानों पर करीब 100 फीट की ऊंचाई से पानी गिरता है। वहीं इसका छद्म रूप भी तकरीबन 100 फीट है।
कठनमुंडी गुफा में आदिमानव काल के शैलचित्र
जिस जगह से रास्ता दो पगडंडियों में बंटता है, वहां से बाईं तरफ करीब 100 फीट नीचे उतरने के बाद एक छोटी गुफा है जो डोलेराइट की चट्टान से बनी हुई है। भू-विज्ञान की भाषा में इसे ग्रोटो कहा जाता है। स्थानीय ग्रामीण इस गुफा को कठनमुंडी गुफा के नाम से जानते हैं। यहां उत्तर बस्तर के महापाषाणकालीन परंपरा के अनुसार आदिमानव काल की चित्रकला भी देखने को मिलती है। गुफा के अंदर की छत में लाल रंग से कई तरह के चित्र बने हुए हैं, जिन्हें देखने से आदिमानवों के समय की तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था की जानकारी भी मिलती है।
सालों से लाल रंग में जस के तस हैं चित्र: विशेषज्ञ
भू-विज्ञान विशेषज्ञ नक्का बताते हैं कि गुफा में मिले शैलचित्रों में एक मनुष्य चौपाए जानवर के साथ तो कहीं मनुष्य नन्हें बालक के साथ, कहीं दो मनुष्य हाथ में तलवार-ढाल जैसे शस्त्र थामे दिख रहे हैं तो कहीं ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि कुछ लोग किसी जानवर का शिकार कर रहे हैं। इन शैलचित्रों को जब उन्होंने पानी से धोकर देखने की कोशिश की तो उनका रंग कम नहीं हुआ। ऐसे में ये शैलचित्र महापाषाणकालीन माने जा सकते हैं। नक्का बताते हैं कि इस गांव के बाहर दाहिने तरफ करीब सौ फीट की दूरी तय करने पर एक पेड़ की जड़ के नीचे स्वच्छ जल का प्राकृतिक स्रोत भी मिला है, जिसका उपयोग गांव के लोग पीने के पानी के लिए करते हैं।
डोलेराइट चट्टानों से बना है उमरादाह जलप्रपात
उमरादाह गांव पूरी तरह से जंगलों से घिरा हुआ है। होनहेड़ से करीब 7 किमी दूर उत्तर दिशा की तरफ स्थित पर्वत क्षेत्र तक पहुंचने के लिए लिंगोपथ के दायरे में आता है। यहां पहुंचने पर गांव से ठीक बाहर उत्तर दिशा में आगे बढ़ते हुए करीब आधा किमी की दूरी पर 30 डिग्री की सीधी ढलान से जैसे ही नीचे उतरा जाता है तो जलप्रपात की गर्जना सुनाई देती है। यहां से रास्ता दो पगडंडियों में बंट जाता है, जहां से करीब 200 फीट आगे बढ़ने पर डोलेराइट चट्टानों के बीच सफेद ग्रेनाइट की चट्टानों पर एक स्थानीय नाला करीब 100 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। इसके कुछ दूरी पर फिर डोलेराइट और सफेद ग्रेनाइट की चट्टानों से होता हुआ जलप्रपात कई छोटे प्रपात बनाता हुआ आगे बढ़ता है।
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