दंतेश्वरी मंदिर बंद फिर भी बीजापुर-नारायणपुर से मीलों पैदल चलकर पहुंचे श्रद्धालु, कहा- मां के दरबार आना बड़ा सौभाग्य
कोरोना के कारण कड़ाई के बीच भी नवरात्र की पंचमी पर माई के भक्त खुद को माता से दूर नहीं रख पाए। पंचमी पर दिनभर मंदिर में श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला चलता रहा। बड़ी बात ये है कि मंदिर बन्द की जानकारी होने के बाद भी श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। रास्तेभर न तो सुविधा केंद्र न तो ठहरने की किसी भी तरह की सुविधा, तब भी माता के भक्त बीजापुर से मीलों पैदल चलकर दंतेवाड़ा पहुंच गए। लेकिन यहां माई के भक्तों को बिना दर्शन किए, सिर्फ मुख्यद्वार पर मत्था टेक कर ही वापस पैदल निकलना पड़ा।
बीजापुर से करीब 90 किमी पैदल चलकर दंतेवाड़ा पहुंची श्रद्धालु संतोषी, दीपा, महिमा, विशाखा, चांदनी ने बताया कि हम सभी 18 तारीख की सुबह बीजापुर से ही पैदल निकले थे। दूसरी बार है जब हम इस पर्व पर पैदल दंतेवाड़ा आ रहे हैं। हमें जानकारी थी कि दरबार बंद है, दर्शन का सौभाग्य तो नहीं मिला लेकिन दंतेवाड़ा की धरती पर कदम रख मां के द्वार पर ही मत्था टेक हम धन्य हो गए। रास्ते में इस बार सुविधा केंद्र नहीं हैं, मां के दरबार पहुंचना था तो भय किस बात का।
पंचमी पर ही जुटते थे 2 लाख से ज्यादा भक्त
शारदीय नवरात्र की पंचमी पर हर साल करीब 2 लाख भक्त जुटते थे। पहली बार माई के दरबार मे शारदीय नवरात्र की पंचमी को सूनापन रहा। मन्दिर परिसर, डोम पूरा खाली रहा। हालांकि दिनभर में करीब 500 भक्त दंतेवाड़ा पहुंच ही गए। नारायणपुर से दंतेवाड़ा पहुंचे माई के भक्तों ने कहा कि दरबार के सामने आने का एक अलग सुकून है।
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