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प्रयास विद्यालय के तीन छात्रों ने जेईई मेंस में बाजी मारी

बस्तर के आदिवासी बच्चे अब देश की सर्वोच्च संस्थाओं में पढ़ने के लिए आगे बढ़ते चले जा रहे हैं। पिछले दिनों अखिल भारतीय स्तर पर इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए ली गई परीक्षा जेईई मेंस में बस्तर जिले के प्रयास विद्यालय के 10 विद्यार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 3 छात्रों ने बाजी मार ली है।
इनमें से दो का चयन आईआईटी के लिए हुआ है, वहीं एक एनआईटी के लिए चुना गया है। ऐसे में बस्तर के दो आदिवासी बच्चे अब देश की सर्वोच्च संस्थाएं मानी जाने वाली आईआईटी में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करेंगे। बीते दिनों नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा ली गई परीक्षा के नतीजे सोमवार की देर शाम जारी किए गए। जारी नतीजों के बाद ज्वाइंट सीट अलॉटमेंट अथॉरिटी (जोसा) 2020 द्वारा काऊंसिलिंग की गई, जिसमें दो छात्रों को आईआईटी और एक को एनआईटी मिला है।

एक रोपर तो दूसरे का बीएचयू आईआईटी में दाखिला
प्रयास विद्यालय में पढ़ रहे उमेश कुमार ध्रुव ने ओवरऑल रैंकिंग में 119739 तो कैटेगरी रैंकिंग में 1393वां स्थान हासिल किया है। वहीं काउंसिलिंग के बाद उन्हें रायपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के लिए चुना गया है। वहीं चंचल रावटे ने देशभर में 187253वां और कैटेगरी रैंकिंग में 2792वां स्थान हासिल किया, जिन्हें पंजाब के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रोपर में और डिकेश कुमार ने देशभर में 265075वां और कैटेगरी रैंकिंग में 4911वां स्थान हासिल किया, जिन्हें काऊंसिलिंग के बाद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के आईआईटी के लिए चुना गया है।

पिता ने कभी सोचा ही नहीं था कि उनके बच्चे देश के सर्वोच्च संस्थानों में पढ़ेंगे
भिलाई स्टील प्लांट में निम्न श्रेणी के कर्मचारी की बेटी चंचल ने बस्तर जिले के प्रयास विद्यालय से तैयारी की और आईआईटी में अपनी जगह बना पाने में कामयाब हुई हैं। उन्होंने बताया कि वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद देश के लिए कुछ कर गुजरना चाहती हैं। ऐसे ही डिकेश के पिता पंचायत सचिव और उमेश के पिता किसान हैं। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनके बच्चे देश के ऐसे सर्वोच्च संस्थानों में पढ़ने के लिए चुने जाएंगे। संस्था के प्राचार्य गजेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सभी बच्चों ने भरसक मेहनत की और यही कारण है कि वे देश के सर्वोच्च इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए चुने गए हैं।



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