बायोगैस उपयोग करने वाला जिले का पहला गांव बना टेकनार, लकड़ी न सिलेंडर की झंझट
टेकनार के ग्रामीणों के घर पर खाना बनाने अब न तो लकड़ियां और न ही सिलेंडर की जरूरत पड़ रही है। इस गांव के करीब 10 घरों में बायोगैस कनेक्शन देने का ट्रायल सफल हो गया। ग्रामीणों को अच्छा फायदा मिलने लगा है और बायोगैस प्लांट स्थापना करने वाला दंतेवाड़ा जिले का यह पहला गांव बन गया। इस गांव के गौ संवर्द्धन केंद्र में 10 घन मीटर वाले इस प्लांट की स्थापना हुई है। जिन घरों में यह कनेक्शन दिया गया है वे ग्रामीण बेहद खुश हैं। टेकनार की सफलता के बाद अब जिले के और भी गांवों में इस तरह का प्लांट स्थापित करने की तैयारी जिला प्रशासन कर रहा है।
कलेक्टर दीपक सोनी ने भास्कर को बताया कि गोबर गैस प्लांट अभी सिर्फ टेकनार में ही है। पहले फेज में 22 गांवों के गोठान में प्लांट तैयार कर आसपास के ग्रामीणों को इसका फायदा देने की तैयारी है। इसके बाद और भी गांवों में इसकी स्थापना होगी।। पशु चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अजमेर सिंह कुशवाह ने कहा कि गोठानों में पर्याप्त गायें व गोबर की व्यवस्था है। जिन गांवों के गोठानों में गोबर गैस प्लांट स्थापित होगी वहां के आसपास के करीब 1 किमी दायरे में आने वाले घरों के ग्रामीणों को कनेक्शन दिया जाएगा। आने वाले समय में दंतेवाड़ा जिले के करीब 1500 घरों में बायोगैस कनेक्शन होगा।
10 घनमीटर का है प्लांट: क्रेडा विभाग के ईई राकेश वर्मा ने बताया कि टेकनार में स्थापित 10 घनमीटर गैस उत्पादन के इस प्लांट से करीब 4-5 घंटे तक गैस का चूल्हा जल जाता है। रोजाना 250 किलो गोबर और पानी डाला जाता है। अभी प्लांट की क्षमता के हिसाब से कनेक्शन दिए जा चुके हैं। जरूरत पड़ी तो बढ़ाया भी जाएगा। जिनके पास पशु है वो इस प्लांट को आसानी से बना सकते हैं और रसोई गैस के साथ खेत के लिए खाद भी बना सकते हैं।
महिलाएं बोलीं- जंगल से लकड़ी लाने से मिलेगी मुक्ति
टेकनार में सुनीता, जुगरी, मेहतरीन, आयती, सोमारी सहित अन्य घरों में अभी कनेक्शन दिया गया है। महिलाओं ने बताया हमें नहीं पता था कि गोबर गैस का भी हम ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। ये अच्छा विकल्प है। हर महीने गैस सिलेंडर खरीदने व लकड़ियां लाने से मुक्ति मिलेगी।
मॉनिटरिंग के अभाव में 2 साल पहले हुआ था फेल
इस गांव में बायोगैस प्लांट के लिए करीब दो साल पहले ही काम शुरू हो चुका था, लेकिन सही मॉनिटरिंग के अभाव में काम अटका पड़ा था। शुरू कराने अफसरों ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई थी। डॉ. अजमेर ने बताया कि कलेक्टर दीपक सोनी के प्रयास व मार्गदर्शन में इसे फिर से शुरू किया जा सका है।
बायोगैस के ये हैं फायदे
- बेहद सस्ता ईंधन है। हालांकि अभी मुफ्त में क्रेडा विभाग ने दिया है।
- इसके उपयोग से प्रदूषण नहीं होता है।
- बायोगैस के उत्पादन के साथ-साथ खाद भी मिलता है।
- यह प्रदूषण को भी नियंत्रित रखता है, क्योंकि इसमें गोबर खुले में पड़े नहीं रहते, जिससे कीटाणु और मच्छर नहीं पनप पाते हैं।
- बायोगैस के कारण लकड़ी की बचत होती है।
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