शाला त्यागी बालिकाओं का स्कूल में करा रहे प्रवेश
जिले में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में योजना के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न प्रकार के जागरूकता व संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिले में लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम का व्यापक प्रचार एवं प्रसार किया जा रहा है। बालिकाओं के शिक्षा पर जोर देते हुए किशोरी सशक्तिकरण का प्रयास किया जा रहा है।
जिले में ऐसे बालिका जो किसी भी कारण से पढ़ाई छोड़ चुकी है उन बालिकाओं का चिह्नांकन कर फिर से शाला से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। बीजापुर ब्लाॅक से 638, भोपालपटनम से 600, भैरमगढ़ से 1122 एवं उसूर से 1010 बालिकाओं का चिह्नांकन किया गया है, जिन्हें फिर से शाला प्रवेश करवाया जा रहा है, ताकि उनकी न्यूनतम शिक्षा पूरी हो सके। ग्राम पंचायतों में कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भ्रमण के दौरान बालिकाओं के कम उम्र में शादी से होने वाले दुष्परिणाम की भी जानकारी दी जा रही है। ग्राम पंचायतों में सरपंचों एवं पंचों को भी यह बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य, किशोर-किशोर सशक्तिकरण अंतर्गत बाल विवाह की हानियां, बाल विवाह की रोकथाम के उपाय, किशोरियों के पोषण एवं स्वच्छता से संबंधित मुद्दे एवं समाधान, बच्चों के अनैतिक व्यापार अधिनियम, ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित पलायन पंजी, ग्राम पंचायत स्तर पर शाला त्यागी बालक-बालिकाओं को स्कूल से जोड़ने पर एवं गोद लेने की वैधानिक प्रक्रिया, दत्तक ग्रहण नियम 2017, बाल श्रम अधिनियम पर चर्चा कर जानकारी दी गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी लुपेन्द्र महिलांग ने बताया कि इस अभियान के तहत नियमित रूप से जिले में प्रचार-प्रसार का कार्य किया जा रहा है।
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