एसईसीएल चिरमिरी की लीज की 10 एकड़ भूमि में फैला अवैध ईंट का कारोबार, चोरी का कोयला यहीं खपा रहे
बीते दो दशक से जिले का ही नहीं बल्कि संभाग का सबसे बड़ा अवैध ईंट भट्ठा बड़ा बाजार के इंद्रा नगर के पीछे 10 एकड़ एसईसीएल की लीज की जमीन में संचालित किया जा रहा है। इसके ठीक सामने एसईसीएल चिरमिरी ओपन कास्ट द्वारा कोयला खनन किया जाता है।
साल में करीब 1800 टन चोरी का कोयला ईंट पकाने में उपयोग किया जाता है। इसकी अनुमानित लागत 1 करोड़ से अधिक आंकी गई है। ईंट भट्ठे में काम करने वालों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह भट्ठा पूरी तरह अवैध है। यहां से खनिज विभाग में रॉयल्टी नहीं दी जाती, लेकिन अफसरों को कार्रवाई नहीं करने 1 हजार ईंट पर 150 रुपए के हिसाब से रुपए भेजे जाते हैं। शहरी क्षेत्र में लगभग 50 अवैध ईंट भट्ठा संचालित हो रहा है। इससे करीब 20 लाख रुपए की रॉयल्टी का नुकसान खनिज विभाग को हो रहा है। अवैध ईंट का यह पूरा काम एसईसीएल के सुरक्षाकर्मी से लेकर अफसरों, खनिज विभाग के अफसरों की मिलीभगत से होता है। वहीं कोयले की आपूर्ति करने ईंट भट्ठा संचालक एसईसीएल की बंद खदानों से अवैध कोयला भी खनन कराते हैं। जानकारी के अनुसार इंद्रा नगर पीछे जहां अवैध कोयले का कारोबार होता है, वह जमीन एसईसीएल लीज की है। वहीं जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 300 से अधिक अवैध ईंट भट्ठा संचालित किया जा रहा है, लेकिन जिले के बड़ा बाजार इंद्रा नगर के पीछे चिरमिरी ओसीपी के ठीक सामने चोरी के कोयले से अवैध ईंट बनाने का सबसे बड़ा कारोबार किया जा रहा है। ओसीपी चिरमिरी और इंद्रा नगर बड़ा बाजार से चिरमिरी थाना की दूरी एक किमी है, जबकि एसडीएम और कार्यालय की दूरी करीब तीन किमी है। यहीं नहीं हर दिन एसईसीएल के अफसर और यूनियन नेताओं का आना-जाना यहां की सड़कों से होता है, लेकिन कार्रवाई कभी नहीं होती। खनिज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 6 लोगों को लाल चिमनी ईंट बनाने की अनुमति दी गई है।
10 एकड़ में फैला है अवैध ईंट का कारोबार
खनिज विभाग के अधिकारी ने बताया कि वैध ईंट बनाकर बेचने से 150 प्रति हजार ईंट की रॉयल्टी चुकानी पड़ती है। मतलब एक लाख ईंट पर करीब 15 हजार रुपए राॅयल्टी खनिज विभाग और डीए फंड में देना होता है। करीब दस एकड़ में फैले अवैध ईंट के कारोबार में हर साल 30 लाख ईंट बनाई जाती है। इसमें करीब 3 लाख रुपए की रॉयल्टी चोरी की जाती है, जो सीधे खनिज विभाग के अधिकारियों के हाथ पहुंचती।
चोरी की बिजली और पानी का हो रहा अवैध उपयोग
चिरमिरी ओसीपी से हर महीने में 15 टन से अधिक चोरी का कोयला इंद्रा नगर में संचालित अवैध ईंट भट्ठा में ईंट पकाने के लिए उपयोग किया जा रहा है। यहां पर्यावरण विभाग, खनिज विभाग समेत राजस्व विभाग की नजर नहीं पड़ती है। यहां रॉयल्टी क्लीयरेंस का भी मामला नहीं आता, जबकि अवैध तरीके से मिट्टी, कोयला, चोरी की बिजली और पानी का उपयोग किया जा रहा है।
मामले में नए सिरे से शिकायत कराएंगे दर्ज
एसईसीएल चिरमिरी जीएम घनश्याम सिंह ने बताया कि अब तक कितनी शिकायत की गई है, मैं दिखवाता हूं और इस मामले की नए सिरे से शिकायत भी दर्ज कराएंगे। कोयला चोरी हो रहा है, उसे कैसे रोक सकते हैं। इसका भी उपाय करेंगे।
कार्रवाई में राजनीतिक दबाव आ रहा आड़े
खनिज विभाग के माइनिंग इंस्पेक्टर नीरज शर्मा ने बताया कि इतने बड़े क्षेत्र में कोयला बनाया जा रहा है, जहां दो-चार अधिकारी-कर्मचारी जाकर कार्रवाई नहीं कर सकते है। वहां राजनीतिक दबाव भी रहता। इसके लिए ज्वाइंट कमेटी बनाकर कार्रवाई की जा सकती है।
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