कमारडेरा में घुसे हाथी, केला बाड़ी उजाड़ी, 2 घर भी तोड़े
हथिनी चंदा के गले पर लगी कॉलर आईडी बंद है। ऐसे में हाथियाें के दल की निगरानी मुश्किल हाे गई है। इनका उत्पात भी बढ़ गया है। बीती रात हाथियाें का दल रात करीब 12 बजे के बाद उरपुटी के कमार डेरा में घुस गया। यहां केला बाड़ी उजाड़ दी। 2 घर तोड़े हैंं। गांव के लाेगाें व वनकर्मियाें काे दाैड़ाया है।
22 हाथियों के दल ने चारामा के जंगलों से लाैटकर गंगरेल बांध के डूबान इलाके में डेरा डाला है।
गंगरेल बांध को तैरकर हाथियों का दल पहरिया कोन्हा की पहड़ियों तक गया। शुक्रवार देर-रात को आगे बढ़ गए। कलारबहरा, पहरियाकोना, अरौद, हरफर तथा बरबांधा के जंगलों में घूमते रहे। रात 1 बजे के करीब अरौद डुबान के आश्रित गांव उरपुटी के जंगल में आ धमके। कमार डेरा में घुसकर केला बाड़ी को नुकसान पहुंचाया। पेड़ उखाड़े। चैतूराम मंडावी और तुलसीराम मंडावी के घर को तोड़ा।
घटना के समय दोनों के परिवार के करीब 10 सदस्य कमरे में सोए थे। घर तोड़ते ही सभी बाहर भागे। हाथियों ने गांव के लाेगाें व वन कर्मचारियों को दौड़ाया। डीएफओ अमिताभ वाजपेयी ने बताया कि उरपुटी के कमार डेरा में दो घर को हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। चंदा के गले पर लगी कॉलर आईडी बंद होने की जानकारी अफसराें को दी गई है।
दोबारा गंगरेल डूबान में हाथियों ने डाला डेरा
मई के अंतिम सप्ताह में गरियाबंद क्षेत्र से 21 हाथियों का दल मगरलोड ब्लॉक में आया। गंगरेल डुबान में दलदल में फंसकर 15-16 जून को एक बच्चा हाथी की मौत हो गई। करीब हफ्तेभर यहां रहने के बाद हाथियों का दल कांकेर की ओर गया। मगरलोड होते वापस गरियाबंद लौटा। सितंबर के दूसरे सप्ताह में दोबारा धमतरी आया। बालोद, कांकेर होते भानुप्रतापपुर के बरही जंगल तक गया। यहां से वापस लौट आया। हाथियों का दल गंगरेल डुबान के जंगल में है। शनिवार शाम 5 बजे हाथियाें का झुंड धमतरी व केरेगांव रेंज के बीच जंगल में दिखे।
कॉलर आईडी बंद, नहीं मिल रही सही लोकेशन
हथिनी चंदा को साल 2017 में महासमुंद के जंगल में सेटेलाइट रेडियो कॉलर आईडी पहनाई थी। यह काॅलर आईडी बीते 3 दिन से बंद है। ऐसे में अब अफसराें काे हाथियों के दल की निगरानी करने में दिक्कत हो रही है। हर समय हाथियों के झुंड की सही स्थिति की जानकारी नहीं मिल रही है। मैदानी कर्मचारी दिन में जैसे-तैसे निगरानी तो कर रहे, लेकिन रात में वास्तविक स्थिति की जानकारी लेने में मुश्किल हो रही है। उरपुटी में एक वन कर्मचारी से हाथी से महज 3 फीट दूर पर खड़ा था। चिंघाड़ सुनकर वहां से जान बचाकर भागा।
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