एटीएम से सवा करोड़ उड़ाने वाले गैंग के 2 और लोग गिरफ्तार
स्टेट बैंक के एटीएम से सवा करोड़ रुपए पार करने वाले गिरोह के दो अन्य सदस्यों को पुलिस ने कोरबा से गिरफ्तार किया है। सीएसपी हेमसागर सिदार और कोतवाली टीआई एमन साहू ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि गिरोह के सदस्य कोरबा में भी ऐसी ही घटना को अंजाम देने सक्रिय हुए हैं। इसके बाद एक विशेष टीम को गिरफ्तारी के लिए कोरबा भेजा गया था। यहां से टीम ने कानपुर निवासी निर्भय प्रताप यादव और महेंद्र पाल को गिरफ्तार किया है।
एटीएम से पैसे उड़ाने के मामले में निर्भय प्रताप गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। निर्भय बीएससी और कम्प्यूटर में डिप्लोमा कर चुका है। उसने ही एटीएम से पैसे निकालने और फिर बैंक से क्लेम लेने का तरीका इजाद किया था। पुलिस ने इनके पास से एक ब्रेजा गाड़ी और कई बैंकों के एटीएम
बरामद किए हैं।
गौरतलब है कि जगदलपुर के स्टेट बैंक के एटीएम सेंटरों से जौनपुर के गिरोह ने सवा करोड़ रुपए का चूना बैंक खातों और एटीएम कार्डों के जरिए लगाया था। गिरोह ने कुल 47 बैंक एकाउंट और 27 एटीएम कार्डों का उपयोग किया। पैसों के ट्रांजेक्शन और पैसे निकालने के लिए अपने रिश्तेदारों और गांव के लोगों को भी धोखे में रखकर उनके बैंक खातों का उपयोग किया गया और इनसे पांच-पांच हजार रुपए एटीएम के बदले किराया भी दिया। इसके पहले दो आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया जा चुका है।
ऐसे उड़ा रहे थे एटीएम से पैसे
बस्तर एसपी दीपक झा ने बताया कि इन्होंने एटीएम से तो पैसे उड़ाए ही, उसके बाद क्लेम करके एसबीआई से भी पैसे ठगे हैं। गैंग के सदस्यों को कहीं से पता चला कि एनसीआर कंपनी के एटीएम में पैसे निकालने के दौरान गड़बड़ी की जा सकती है। गैंग के सदस्य एटीएम से पैसे निकालते समय जिस स्थान पर पैसे फंसे होते थे उस खांचे को हाथ से पकड़ लेते थे। इसके बाद जितनी भी रकम निकाली होती थी उसमें से सिर्फ पांच सौ को खांचे में छोड़ देते थे। चूंकि मशीन की सेंटिग ऐसी है कि यदि एक नोट भी मशीन में बच जाए तो वह वापस चला जाता है और एंट्री एरर कर देती है। इसी एरर रिपोर्ट को आधार बनाकर एसबीआई से क्लेम कर दोबारा रकम ले लेते थे। यह खेल तीन महीनों तक चला और इस दौरान करीब सवा करोड़ रुपए ठगों ने निकाल लिए।
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