अब बुजुर्ग महिलाएं पोषण के लिए करेंगी जागरूक
दंतेवाड़ा में स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देने अब गांव की ही दादियां और बुजुर्ग महिलाएं मोर्चा संभालेंगी। यूनिसेफ के सहयोग से जिला प्रशासन गुरुवार को एक कार्यक्रम लांच कर रहा है। जिसका नाम ‘बापी ना उवाट’ यानी ‘दादी के नुस्के’ रखा गया है। फिलहाल इस कार्यक्रम की अवधि सालभर की रखी गई है। दंतेवाड़ा के 239 गांवों में से 221 गांवों की इच्छुक दादियों व बुजुर्ग महिलाओं की सूची भी विभाग ने बना ली है। इनमें शहर के करीबी गांव से लेकर अंदरूनी नक्सलगढ़ गांव तक को शामिल किया गया है। 18 गांवों की अभी सूची बन रही।
कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया दंतेवाड़ा के हर गांव में स्वास्थ्य व पोषण के लिए काम हो रहे हैं लेकिन इस बार गांव की ही दादियों व बुजुर्ग महिलाओं की मदद ली जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी वीएस ठाकुर ने बताया कि इस कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार कर ली गई है। 10 दिसंबर को कार्यक्रम लांच होगा। इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में रखा गया है।
गोंडी-हल्बी में ग्रामीणों से संवाद होगा फायदेमंद
फिलहाल हुई प्लानिंग के मुताबिक हर गांव में मितानिन व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तो हैं ही लेकिन अब एक बुजुर्ग महिला शामिल की गई है। जो स्थानीय बोली गोंडी व हल्बी में स्वास्थ्य और पोषण के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने का काम करेंगी। प्रशासन का मानना है कि जब बुजुर्ग महिला निःस्वार्थ भाव से जब ग्रामीणों के बीच जाकर उन्हें स्वास्थ्य, पोषण के बारे में बताएंगी तो निश्चित ही इसका प्रभाव पड़ेगा।
पोषण के कार्यक्रमों को पहले भी मिली सराहना
यह पहली बार नहीं है जब दंतेवाड़ा में स्वास्थ्य व पोषण पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम हो रहे हैं। दंतेवाड़ा में डेढ़ साल पहले सुपोषण दंतेवाड़ा अभियान शुरू किया गया था।इससे बदलाव भी आने शुरू हुए। दंतेवाड़ा को मॉडल मानते हुए इसे अन्य जगह भी लागू किया गया। स्वास्थ्य व पोषण के लिए दंतेवाड़ा में हो रहे कार्यों की नीति आयोग से भी सराहना मिल चुकी है।
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