अंतिम अगहन बृहस्पति को माता लक्ष्मी का हुआ पूजन
इस गुरूवार को अगहन बृहस्पति व्रत का समापन हुआ। पूस मास में पर्व कम पड़ते हैं तथा शादी विवाह भी नहीं होते। अगहन बृहस्पति व्रत के अंतिम दिन माता लक्ष्मी की पूजा के साथ कई जगह महिलाओं ने सामूहिक रूप से रामायण पाठ तथा भजन कीर्तन किया।
अगहन मास में गांवों के साथ शहर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं घर की सुख शांति तथा समृद्धि के लिए माता लक्ष्मी का पूजन करती हैं। गुरुवार के दिन माता लक्ष्मी का पूजन विधि विधान से दिन में तीन बार सुबह, दोपहर तथा शाम को किया जाता है। उपवास रखकर माता लक्ष्मी को मोकैया, इमली, अमरूद व फूल चढ़ाया जाता है। अपने घर के आंगन से लेकर पूजन कक्ष तक आटा का अल्पना बनाकर माता लक्ष्मी का पद चिन्ह बनाया जाता है। ग्राम ठेलकाबोड़ में मानस महिला मंडली ने पूजा के बाद सामूहिक रूप से रामायण पाठ तथा भजन कीर्तन किया। मंडली से जुड़ी पद्मनी देवकर, योगिता ठाकुर, तिजमत डहरे, छाया चौहान, अनिता सिन्हा, तमेश्वरी सिन्हा, भवगती, रामेश्वरी सिन्हा, प्रियंका दीवान ने कहा अगहन मास में पूजा के साथ रामायण पाठ भी किया। अगहन मास पर्व पर उनकी काफी आस्था है। शहर के दूध नदी कालोनी में भी महिलाओं ने माता लक्ष्मी का पूजन किया। दोपहर से शाम तक भजन कीर्तन किया। पूजा में शामिल शामिल प्रीति ठाकुर, चंद्रिका साहू, राधिका तिवारी, सुमित्रा शर्मा, बसंती ठाकुर, हेमलता साहू, रूचि ठाकुर, मंजु यादव, उषा भारदवाज, सरिता ने कहा इस व्रत में माता लक्ष्मी के साथ रामायण पाठ व भजन कीर्तन भी करते हैं।
अगले गुरुवार से पूस मास की शुरू होगी
अगले गुरूवार 31 दिसंबर से पूस मास की शुरुआत होगी। पूस मास का समापन 28 जनवरी को होगा। ज्योतिषी गीता अशोक शर्मा ने कहा अगहन मास के बाद आने वाले गुरूवार से पूस मास की शुरुआत होगी। पूस मास को खर मास भी कहते हंै। पूस मास में विवाह के साथ अन्य मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
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