विवादों के बीच भंग करनी पड़ गई पीआईसी सभा
नगर पंचायत में बैठी भाजपा की सरकार ने प्रेसिडेंट ऑफ कांउसिल की सभा को गुरुवार को भंग कर दिया। सभा को भंग करने का मुख्य कारण सदस्यों का आपसी विवाद रहा।
भाजपा के पार्षद अजय बंसल, सुनील अग्रवाल एवं कांग्रेसी पार्षद सतीश गर्ग ने बताया कि शहर की नगर पंचायत मे भाजपा की सरकार काबिज है। नगर पंचायत के उपाध्यक्ष श्याम नारायण गुप्ता एवं तात्कालिक सीएमओ जयमंगल सिंह परिहार के हस्ताक्षर से 30 दिसंबर को लगभग 90 लाख रुपए का भुगतान बगैर जानकारी के कर दिया गया। इस विवाद में नगर पंचायत अध्यक्ष सुचीता एक्का ने भी अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि उनकी मौजूदगी रहने के बाद भी नगर पंचायत के तात्कालिक सीएमओ एवं उपाध्यक्ष ने आपसी सांठ-गांठ कर वित्तीय पावर अपने हाथ में लेते हुए बगैर जानकारी के एक ही दिन मे लगभग 90 लाख रुपए का बिल भुगतान कर दिया। यह मामला इतना तुल पकड़ा की अध्यक्ष सुचीता एक्का ने उपाध्यक्ष एवं नगर पंचायत के तात्कालिक सीएमओ के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करने तक की बात कह दी। वहीं नगर पंचायत के उपाध्यक्ष श्यामनारायण गुप्ता से नगर पंचायत अधिनियम का हवाला देते हुए बताया कि जब आवश्यक एवं मूलभूत कार्यों का भुगतान अध्यक्ष की अनुपस्थिति के कारण बाधित होते हो तो नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं उपाध्यक्ष के धनादेश से भुगतान किया जा सकता है। जिसके तहत संबंधित बैंक मे मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर नमूना विधिवत पेश किया जाता है। उन्होंने नगर पंचायत अधिनियम के दायरे में रहकर वित्तीय पावर का इस्तेमाल करते हुए आवश्यक एवं मूलभूत कार्यों के बिल का भुगतान किया था। लेकिन बगैर जानकारी के लाखों का बिल भुगतान की बात नगर पंचायत की स्वयं अध्यक्ष के अलावा अन्य पार्षदों को भी नागवार गुजरी। उन्होंने उपाध्यक्ष की कलम से हुए बिल भुगतान का विरोध करते हुए नई पीआईसी सभा का गठन करने की मांग उठा दी। जिसके बाद अध्यक्ष ने पुरानी पीआईसी सभा भंग करने के आदेश पारित कर दीं।
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